प्यार करने वालों

बेवफा से वफा न करना, उसके झूठे प्यार मे न पड़ना। वो तुम्हे बर्बाद कर डालेगी, बेवफा से कभी प्यार न करना।१। लड़की होती है धोखेबाज़, उन्हें रूह पर रहता नाज। अपने को कहती भोली भाली, आलू के साथ चुरा लाती है प्याज़।२। ये नहीं होती कभी भली, पैसा मांगे हमसे गली-गली। न दो अगर इन्हें फूटी कौड़ी, हमको कहती रोज बुरी भली।३। रूह सवारे चलती फिरती, ले स्कूटी गन्दे नाले पे गिरती। गन्दे नाले से जो उठाओ इन्हें, तो ये आशिक को भी भैया कहती।४। मन्द बुद्धी है लड़की नाम, इनसे बचना सब क काम। जो इनसे गर बच नहीं पाया, उस बन्दे का हुआ काम तमाम।५

Prinshu Lokesh tiwariजो प्राप्त है वही पर्यात्त है
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मेरी आवाज

शायरी और कविताएँ ।

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हमारी इस दुनिया में देखने के लिए बहुत कुछ है | लेकिन क्या आप जानते हैं की इस दुनिया में कई ऐसे स्थान भी हैं जो वक़्त के सितम के चलते अब बिलकुल वीरानों में तब्दील हो गए हैं | तो चलिए पढ़ते हैं दुनिया की ऐसी ही १० जगहों के बारे में |

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प्यार करने वालों

बेवफा से वफा न करना, उसके झूठे प्यार मे न पड़ना। वो तुम्हे बर्बाद कर डालेगी, बेवफा से कभी प्यार न करना।१। लड़की होती है धोखेबाज़, उन्हें रूह पर रहता नाज। अपने को कहती भोली भाली, आलू के साथ चुरा लाती है प्याज़।२। ये नहीं होती कभी भली, पैसा मांगे हमसे गली-गली। न दो अगर इन्हें फूटी कौड़ी, हमको कहती रोज बुरी भली।३। रूह सवारे चलती फिरती, ले स्कूटी गन्दे नाले पे गिरती। गन्दे नाले से जो उठाओ इन्हें, तो ये आशिक को भी भैया कहती।४। मन्द बुद्धी है लड़की नाम, इनसे बचना सब क काम। जो इनसे गर बच नहीं पाया, उस बन्दे का हुआ काम तमाम।५

अधखिला फूल

'अधखिला फूल' के पृष्ठ 89 पंक्ति में 9 में 'पतोहें' और पृष्ठ 110 पंक्ति 20 में देवतों, और पृष्ठ 129 पंक्ति 10 में बिपतों, शब्द का प्रयोग हुआ है। व्याकरणानुसार इन शब्दों का शुद्ध रूप, पतोहुएँ, देवताओं, और बिपत्तियों, होता है। अतएव यहाँ पर प्रश्न हो सकता है, कि इन शुद्ध रूपों के स्थान पर, पतोहें इत्यादि अशुद्ध रूप क्यों लिखे गये? बात यह है कि पतोहू और बिपत्ति शब्द का बहुवचन व्याकरणानुसार अवश्य पतोहुएँ, और बिपत्तियाँ होगा, परन्तु सर्वसाधारण बोलचाल में पतोहू के स्थान पर पतोह और बिपत्ति के स्थान पर बिपत शब्द का प्रयोग करते हैं, अतएव व्याकरणानुसार इन दोनों शब्दों का बहुवचन पतोहें, और बिपतों किम्बा बिपतें यथास्थान होगा। इसके अतिरिक्त उच्चारण की सुविधा, कारण, अब पतोहुएँ और बिपत्तियों के स्थान पर पतोहें व बिपतों शब्दों का ही सर्वसाधारण में प्रचार है, इसलिए पतोहुएँ और बिपत्तियों के स्थान पर पतोहें और बिपतों लिखा जाना ही सुसंगत है। हाँ देवतों शब्द किसी प्रकार व्याकरणानुसार सिद्ध न होगा, क्योंकि देवता शब्द का बहुवचन जब होगा तो देवताओं ही होगा। अतएव इस शब्द के विषय में अशुद्ध प्रयोग का दोष अवश्य लग सकता है। परन्तु स्मरण रहे कि व्याकरणानुसार यद्यपि देवतों पद असिद्ध है तथापि सर्वसाधारण की बोलचाल में देवताओं शब्द नहीं है, देवता का बहुवचन उन लोगों के द्वारा देवतों ही व्यवहृत होता है, और समाज की बोलचाल को सदा व्याकरण पर प्रधानता है, अतएव देवताओं के स्थान पर देवतों पद का ही प्रयोग किया गया है। किन्तु यदि इसमें मेरा दुराग्रह समझा जावे तो देवतों शब्द के स्थान पर देवताओं शब्द ही पढ़ा जावे, इस विषय में मुझको विशेष तर्क वितर्क नहीं है।

वो लङकी

यह किताब एक सच्ची घटना पर आधारित हैं जो कि खुद लेखक के साथ घटित हुई थी और इस घटना ने लेख़क को बहुत झकझोर कर दिया था तो पढ़िए आप लेखक के प्यार की कहानी उन्ही की जुबानी। अगर कोई त्रुटि हो तो माफ करें।

कोरोना वायरस प्रकोप

वुहान कोरोना वायरस प्रकोप (2019–20) की शुरुआत एक नए किस्म के कोरोनवायरस (2019-nCoV) के संक्रमण के रूप में मध्य चीन के वुहान शहर में 2019 के मध्य दिसंबर में हुई। बहुत से लोगों को बिना किसी कारण निमोनिया होने लगा और यह देखा गया की पीड़ित लोगों में से अधिकतर लोग हुआँन सीफ़ूड मार्केट में मछलियाँ बेचते हैं तथा जीवित पशुओं का भी व्यापर करते हैं। चीनी वैज्ञानिकों ने बाद में कोरोनावायरस की एक नई नस्ल की पहचान की जिसे 2019-nCoV प्रारंभिक पदनाम दिया गया।