ब्लाउज़

शकीला भरे भरे जिस्म की सेहतमंद लड़की थी। हाथ पाँव गुदगुदे थे। गोश्त भरी उँगलियों के आखिर में, हर जोड़ पर एक एक नन्हा गड्ढा था। जब मशीन चलाती थी तो ये नन्हे नन्हे गड्ढे, हाथ की हरकत से कभी गायब हो जाते थे। शकीला मशीन भी बड़ी इत्मीनान से चलाती थी। आहिस्ता आहिस्ता, उसकी दो या तीन उँगलियाँ, बड़ी खूबसूरती के साथ मशीन की हत्थी घुमाती थीं। कलाई में एक हल्का सा ज़ोर पैदा हो जाता था, गर्दन ज़रा उस तरफ़ को झुक जाती थी और बालों की एक लट, जिसे शायद अपने लिए कोई पर्याप्त जगह न मिलती थी, नीचे फिसल आती थी। शकीला अपने काम में इतनी मशगूल रहती थी कि उसे हटाने या जमाने की कोशिश ही नहीं करती थी।

सआदत हसन मंटोसआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) मंटो एक उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए।कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए।कहानियों में अश्लीलता के आरोप की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था, जिसमें से तीन बार पाकिस्तान बनने से पहले और बनने के बाद, लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। इनके कुछ कार्यों का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है। नंदिता दास द्वारा बनाई गई मंटो (2018 फ़िल्म) और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत, एक बॉलीवुड फिल्म है जो मंटो के जीवन पर आधारित है।
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