Poetry
Poems, Shayari and Gazhals. Both modern and classic poetry.
தெனாலி ராமகிருஷ்ணா, நகைச்சுவைக் கவிஞர்

தெனாலி ராமகிருஷ்ணன், தெனாலிராமன் என்றும் விகட கவி என்றும் அழைக்கப்படுகிறார். அவற்றைப் பற்றி இங்கு காண்போம்.

लोकभ्रमाच्या दंतकथा
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या लोकभ्रमाच्या खूपच चमत्कारिक, हास्यास्पद, विनोदी अशा दंतकथा आहेत. या लोकांमध्ये पूर्वी प्रचलित होत्या पण त्या केवळ मिथक आहेत. फक्त एक गम्मत म्हणून वाचाव्यात यातील एकही अक्षर खरे नाही.

छोटे बच्चों के लिए -अस्सी घाट की कविताएँ
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छोटे बच्चों के लिए कुछ खास कविताएँ जब हम दादी के साथ घाट पर टहलने जाते थे तब वह हम बच्चों को ये कविताएँ सुनाती थी! जो कभी बचपन में सुनी थी और अभी भी याद है| आज भी अस्सी घाट पर बैठते हैं तो गंगाजी के पानी को देखकर खूब याद करते हैं | अस्सी घाट की कविताएँ! ये कविताएँ बच्चो को बहुत पसंद आएँगी ऐसा मुझे विश्वास हैं|

सुभाषित माला
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एक नवीन कल्पना घेऊन काही पोस्ट लिहिण्याचा विचार आहे .बऱ्याच वेळा अापण बोलताना म्हणींचा वापर करतो त्याच प्रमाणे संस्कृत सुभाषितांचाहि वापर करतो . संपूर्ण सुभाषित न वापरता त्यातील एखाद्या तुकड्याचा वापर सामान्यत:केला जातो .सुभाषितामुळे अत्यंत कमी शब्दांमध्ये फार मोठा आशय आपल्याला सहज मांडता येतो .ज्याला दोन ओळींमधील गुह्यार्थ असे म्हणता येईल असा भावहि या संस्कृत सुभाषिता मध्ये असतो .इंग्लिश माध्यमामुळे , व मराठी माध्यम असले तरी अनेक कारणांनी वाचनसंस्कृतीचा मुलांमध्ये र्‍हास झाल्यामुळे बर्‍याच वेळा उच्चारलेल्या म्हणीचा किंवा संस्कृत सुभाषिताचा अर्थ मुलांना कळत नाही . पालकांनी मुलांना या सुभाषितांची ओळख करून दिल्यास या प्रयोगामुळे संस्कृत सुभाषिते माहीत होतील .बोलण्यामध्ये जास्त अर्थपूर्णता लालित्य व सौंदर्य निर्माण होईल .जीभ लवचिक व भाषा कमनीय, सौष्ठवपूर्ण होईल .

कविता संग्रह
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कौस्तुभ चौधरी द्वारा लिखी हुई कवितायेँ

प्रेम रस मेंहदी का

मेंहदी में दिया मेंहदी मे कई कलाएँ छिपी हुई हैं। जैसे मेह में कई कलाओं के रूप है। मेह है तो सब कुछ है। प्रकृति की सारी हरीतिमा है। रूप, रस, रंग और लावण्य है। ऐसे ही मेहदी में सब कुछ है। यह अपने में कई कलारंगों को रूपायित करने वाली है। है कोई ऐसा अन्य झाड़ जो लगता है, बंटता है, मडता है, रचना है और रस देता है प्रेम का, सुहाग का, सौभाग्य का, जीवन का।

काव्य रचना

मराठी प्रेम कविता

मेरे लेख

रितेश ओझा द्वारा लिखित लेख

कविता संग्रह : संजय सावळे 3

संजय सावळे यांचा कविता संग्रह

স্মরণ
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১৩০৯ সালের ৭ই অগ্রহায়ণ তারিখে রবীন্দ্রনাথের সহধর্মিণী মৃণালিনী দেবী পরলোকগমন করেন। তাঁহার স্মৃতির উদ্দেশে রবীন্দ্রনাথ যে কবিতাগুলি রচনা করেন সেগুলি মোহিতচন্দ্র সেন -সম্পাদিত রবীন্দ্রনাথের কাব্যগ্রন্থের ষষ্ঠ ভাগে (১৩১০) সংকলিত হয়— অধিকাংশ ‘স্মরণ’-পর্যায়ে, কেবল বর্তমান স্মরণ গ্রন্থের প্রথম তিনটি কবিতা ‘মরণ’-পর্যায়ে। পরে এই কবিতাগুলি একত্র করিয়া স্বতন্ত্র আকারে স্মরণ গ্রন্থ প্রকাশিত হয়। শ্রীসমীরচন্দ্র মজুমদার -কর্তৃক বিশ্বভারতী রবীন্দ্রসদনে উপহৃত রবীন্দ্ৰ-পাণ্ডুলিপি হইতে স্মরণের বর্তমান সংস্করণে কতকগুলি কবিতা-রচনার কাল ও স্থান নির্দিষ্ট হইয়াছে। যে স্থলে তারিখের সহিত সাল উল্লিখিত নাই সে ক্ষেত্রে ১৩০৯ বুঝিতে হইবে।

गावाकडची पहाट

सचिन टोंगे यांचा कविता संग्रह

किनारा

मी पाहत असतो त्यांना.... हरितगृहात उमलणार्‍या झेंडुतुन... कधी मंद वाहणार्‍या वार्‍यातुन.. आणि त्या उन्मत्त लाटांतुन..!! मी येतो भेटायला त्यानां त्याच किनार्‍यावर आजही लाटांच्या रुपात..!

कविता

साक्षी शिंदे यांच्या कविता

कविता

राजेंद्र निळकंठ घोटकर यांच्या कविता

वाट खुल्या आसमंताची

नवीन वर्षाची कविता

पुन्हा एकदा...

Poem by Sanket.

Again and again

A poem about childhood love by Sanket Rankhamb.

किमया

निसर्गाची अद्भुत किमया

प्रेम कविता
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प्रेम कविता

घाटावरची गीते

लोकांसाठीच व लोकांसंबंधीच, लोकांनी रचलेली गीते म्हणजेच लोकगीते. भावना उत्कट होऊन ओठावर येणारी गीते. Ghataarchi geete. Traditional marathi folk songs.

बोरकरांच्या कविता Borkar Kavita

कवीमन म्हणजे काय हे समजण्यासाठी ह्या गोमंतकीय मराठी कवीच्या कविता वाचल्याच पाहिजेत. Borkaranchya kavita.

सफ़र
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दिल को छूने वाली कविताओं का संग्रह है ।

~ काव्यमय मधुरा ~
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हे पुस्तक आजवर मी लिहिलेल्या कवितांचा संग्रह आहे. यात निरनिराळ्या विषयांच्या कविता वाचावयास मिळतील.

मराठी प्रेम कविता

तुमच्या भावनेतून वेक्तं केले जाणारे विचार हेच या किवितेतन आम्ही रंगवणारा

मां.
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ज़िन्दगी का अनमोल खजाना......

माझी कविता

उत्स्फूर्तपणे सुचलेल्या काही कविता

मनाचे पान
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मनाचे पान

संत निवृत्तिनाथांचे अभंग 4

संत निवृत्तीनाथ हे संत ज्ञानेश्वर महाराजांचे थोरले बंधू होत.सर्वसामान्य जनतेला संस्कृत भाषेतील भगवद्‌गीता समजत नव्हती म्हणून निवृत्तीनाथांनी ज्ञानेश्वरांना प्राकृत(मराठी)भाषेत लिहीण्यास सांगितली, तीच "ज्ञानेश्वरी".

संत निवृत्तिनाथांचे अभंग 3

संत निवृत्तीनाथ हे संत ज्ञानेश्वर महाराजांचे थोरले बंधू होत.सर्वसामान्य जनतेला संस्कृत भाषेतील भगवद्‌गीता समजत नव्हती म्हणून निवृत्तीनाथांनी ज्ञानेश्वरांना प्राकृत(मराठी)भाषेत लिहीण्यास सांगितली, तीच "ज्ञानेश्वरी".

ज्ञानदेवांच्या समाधीचे अभंग 2

श्री संत ज्ञानेश्वर महाराजांनी वयाच्या सोळाव्या वर्षी जीवंत समाधी घेतली, त्याने प्रभावित होऊन नामदेव महाराजांनी अभंग लिहीले.